पंचायत ने रेप पीड़िता को गांव से निकाला तो उत्तराखंड HC ने फतवों पर लगाया बैन
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य में एक फतवे पर रोक लगाते हुए बलात्कार पीड़िता के परिवार को उनके गांव से निकालने को गैरकानूनी करार दिया। फतवों को असंवैधानिक करार देते हुए अदालत ने कहा कि उत्तराखंड में सभी धार्मिक संगठनों, सांविधिक पंचायतों और अन्य समूहों को फतवे जारी करने की अनुमति नहीं है क्योंकि यह सांविधिक अधिकारों, मौलिक अधिकारों, गरिमा, दर्जा, सम्मान और व्यक्तियों के दायित्वों का उल्लंघन करता है।
न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक लक्सर में पंचायत के एक बालात्कार पीड़िता के परिवार को गांव से निकालने के संबंध में फतवा जारी करने के मामले में एक समाचार पत्र में एक रिपोर्ट छपी थी। इस संबंध में दायर जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायामूर्ति शरद कुमार शर्मा की एक खंडपीठ ने कहा कि फतवा कानून की भावना के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि बलात्कार पीड़िता से सहानुभूति दिखानी की बजाय पंचायत ने परिवार को गांव से बाहर निकालने का आदेश दिया।
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